Vande Bharat: रायपुर रेल मंडल से प्रस्तावित दो वंदे भारत और दो अमृत भारत ट्रेनों की फाइल रेलवे बोर्ड और जोन के दावों के बीच उलझकर रह गई है। रेल मंडल का दावा है कि प्रस्ताव भेजा जा चुका है, जबकि रेलवे बोर्ड ने ऐसे किसी भी प्रस्ताव के विचाराधीन होने से साफ इनकार किया है। इस खुलासे से यात्रियों में निराशा है।
रायपुर: छत्तीसगढ़ के यात्रियों के लिए खुशखबरी साबित होने वाली वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों की सौगात फिलहाल फाइलों के जाल में फंसकर रह गई है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर रेल मंडल से प्रस्तावित दो वंदे भारत और दो अमृत भारत ट्रेनों को लेकर रेलवे बोर्ड और रेल मंडल के दावों में बड़ा विरोधाभास सामने आया है। एक तरफ मंडल का दावा है कि प्रस्ताव काफी पहले भेजा जा चुका है, तो वहीं दूसरी तरफ रेलवे बोर्ड ने ऐसे किसी भी प्रस्ताव के विचाराधीन होने से साफ इनकार कर दिया है।एक साल से फाइलों में कैद हैं चार महत्वपूर्ण ट्रेनें
रेल मंडल के आधिकारिक दावों के मुताबिक, करीब एक साल पहले रेलवे बोर्ड को दुर्ग-वाराणसी और दुर्ग-जबलपुर रूट पर वंदे भारत एक्सप्रेस, तथा दुर्ग-लोकमान्य तिलक (मुंबई) और दुर्ग-कामाख्या के बीच अमृत भारत एक्सप्रेस चलाने का प्रस्ताव भेजा गया था। इसके साथ ही सात अन्य ट्रेनों के विस्तार की फाइल भी एसईसीआर मुख्यालय के माध्यम से भेजी गई थी। लेकिन, जब इस संबंध में आरटीआई या आधिकारिक पड़ताल की गई, तो रेलवे बोर्ड के संयुक्त निदेशक (कोचिंग) राजेश कुमार ने स्पष्ट किया कि उनके कार्यालय में ऐसा कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। इस खुलासे ने रेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।रोजाना 80 हजार यात्रियों का दबाव
रायपुर रेलवे स्टेशन से रोजाना करीब 80 हजार यात्री सफर करते हैं। राजधानी होने के कारण यहां लगातार भीड़ बढ़ रही है, लेकिन लंबी दूरी की ट्रेनों में हमेशा भारी वेटिंग रहती है।- वाराणसी रूट: रायपुर से वाराणसी के लिए केवल सारनाथ और गोंदिया-बरौनी एक्सप्रेस हैं, जिनमें कन्फर्म टिकट मिलना टेढ़ी खीर है।
- मुंबई और कामाख्या रूट: हावड़ा-मुंबई मुख्य मार्ग पर होने के बावजूद दुर्ग से एलटीटी और कामाख्या के लिए पर्याप्त सीधी ट्रेनें नहीं हैं।
प्रस्तावित ट्रेनों से मिलने वाले संभावित फायदे
एक्सपर्ट बताते हैं कि यदि ये ट्रेनें पटरी पर उतरतीं, तो रायपुर-कामाख्या का सफर 34 से घटकर 30 घंटे, रायपुर-मुंबई का सफर 19-21 से घटकर 17 घंटे, रायपुर-वाराणसी का सफर 19 से घटकर 14 घंटे और रायपुर-जबलपुर का सफर मात्र 7 घंटे में पूरा हो जाता।लवे का आधिकारिक बयान
इस पूरे मामले पर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के सीपीआरओ शेख समी उर रहमान ने स्पष्ट किया है कि रेलवे द्वारा विभिन्न मार्गों पर नई ट्रेनों के संचालन और विस्तार का तकनीकी, वाणिज्यिक और समय-सारणी की दृष्टि से समय-समय पर आकलन किया जाता है। उक्त ट्रेनों के संबंध में भी विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई है, परंतु फिलहाल इनके संचालन की समुचित व्यवहार्यता प्रतीत नहीं होती है। बहरहाल, बोर्ड और मंडल के इन उलट बयानों के बीच यात्रियों की उम्मीदों को करारा झटका लगा है।- रेल मंडल कह रहा है प्रस्ताव भेजा गया, जबकि रेलवे बोर्ड ने प्रस्ताव होने से इंकार किया।
- प्रस्तावित ट्रेनें: दुर्ग-वाराणसी, दुर्ग-जबलपुर (वंदे भारत) और दुर्ग-मुंबई, दुर्ग-कामाख्या (अमृत भारत)।
- रायपुर स्टेशन पर रोजाना लगभग 80 हजार यात्री सफर करते हैं और ट्रेनों में भारी वेटिंग रहती है।
- नई ट्रेनें शुरू होने से मुंबई, वाराणसी और जबलपुर का सफर कई घंटे तक कम हो जाता।
